मोटू पतलू की कहानी (Motu Patlu Ki Kahani in Hindi)

Motu Patlu Ki Kahani in Hindi

मोटू पतलू की कहानी बच्चों की सबसे लोकप्रिय और मनोरंजक कहानियों में से एक है। यह कहानी फुरफुरी नगर में रहने वाले दो घनिष्ठ मित्र मोटू और पतलू के जीवन पर आधारित है। दोनों दोस्त एक-दूसरे से स्वभाव में अलग हैं, लेकिन फिर भी एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं।

मोटू पतलू की कहानी केवल हँसी-मज़ाक तक सीमित नहीं है। इस कहानी में बच्चों के लिए कई महत्वपूर्ण सीख छुपी हुई हैं। यह कहानी दोस्ती, समझदारी, धैर्य, टीमवर्क और सही समय पर सही निर्णय लेने का महत्व सिखाती है। इसी कारण मोटू पतलू की कहानी बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी बहुत पसंद आती है।

मोटू पतलू की कहानी की पृष्ठभूमि

यह कहानी शुरू होती है फुरफुरी नगर से। फुरफुरी नगर एक छोटा लेकिन रंग-बिरंगा शहर है। यहाँ हर दिन कोई न कोई नई समस्या या नया रोमांच देखने को मिलता है। इस नगर के लोग सरल, सीधे और मददगार स्वभाव के होते हैं।

फुरफुरी नगर में हमें देखने को मिलता है:

  • छोटे-छोटे घर
  • चहल-पहल वाला बाज़ार
  • बड़ा खेल का मैदान
  • बच्चे, बुज़ुर्ग और व्यापारी

यहीं पर मोटू और पतलू रहते हैं और यहीं से उनकी मज़ेदार और सीख देने वाली कहानियाँ जन्म लेती हैं।

मोटू का परिचय

मोटू एक भोला-भाला, हँसमुख और दिल का बहुत अच्छा इंसान है। उसे खाने का बहुत शौक है, खासकर समोसे। कई बार समोसे खाने के बाद मोटू में अजीब-सी ताकत आ जाती है।

मोटू की मुख्य विशेषताएँ:

  • दिल का साफ
  • भावनात्मक स्वभाव
  • खाने का बहुत शौकीन
  • थोड़ा जल्दबाज़

हालाँकि मोटू कई बार बिना सोचे-समझे फैसले ले लेता है, लेकिन उसका इरादा हमेशा अच्छा होता है और वह किसी का बुरा नहीं चाहता।

पतलू का परिचय

पतलू मोटू का सबसे अच्छा दोस्त है। वह शांत, समझदार और सूझ-बूझ से काम लेने वाला इंसान है। किसी भी समस्या में पतलू पहले पूरी बात को समझता है, फिर उसका समाधान खोजता है।

पतलू की मुख्य विशेषताएँ:

  • बुद्धिमान
  • धैर्यवान
  • योजनाबद्ध तरीके से काम करने वाला
  • भरोसेमंद दोस्त

पतलू का मानना है कि ताकत से ज़्यादा दिमाग और धैर्य ज़रूरी होते हैं।

मोटू और पतलू की दोस्ती

मोटू और पतलू की दोस्ती इस कहानी की आत्मा है। दोनों एक-दूसरे से स्वभाव में बिल्कुल अलग हैं, लेकिन फिर भी एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। जहाँ मोटू अक्सर जोश में आकर जल्दबाज़ी कर बैठता है, वहीं पतलू शांत रहकर उसे सही रास्ता दिखाता है। मोटू अपनी ताकत और भावनाओं से काम करता है, जबकि पतलू समझदारी और धैर्य से हर स्थिति को संभालता है।

उनकी दोस्ती हमें यह सिखाती है कि सच्ची दोस्ती भरोसे पर टिकी होती है। जब दो दोस्त अलग-अलग तरीके से सोचते हैं, तब वे मिलकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना और सही सलाह देना ही सच्ची दोस्ती की पहचान है।

फुरफुरी नगर का विस्तृत वर्णन

फुरफुरी नगर अपनी अनोखी समस्याओं के लिए जाना जाता है। कभी शहर में कोई अजीब मशीन आ जाती है, कभी कोई रहस्य सामने आता है, तो कभी किसी को मदद की ज़रूरत होती है। नगर के लोग जानते हैं कि जब भी कोई परेशानी आएगी, मोटू और पतलू जरूर आगे बढ़कर मदद करेंगे।

मोटू पतलू की कहानी

एक दिन फुरफुरी नगर में अचानक यह चर्चा फैल गई कि पास के जंगल में एक रहस्यमयी खजाना छुपा हुआ है। लोग कह रहे थे कि जो भी उस खजाने को ढूंढ लेगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा। यह खबर सुनते ही पूरे नगर में हलचल मच गई और हर कोई उसी के बारे में बातें करने लगा।

यह सुनते ही मोटू उछल पड़ा और खुशी से चिल्लाया, “पतलू! अगर खजाना मिल गया तो मैं ज़िंदगी भर समोसे खाऊँगा!”

पतलू ने मुस्कराते हुए लेकिन शांत स्वर में कहा, “मोटू, इतनी जल्दी खुश मत हो। पहले यह समझना ज़रूरी है कि खजाना सच में है भी या नहीं।”

मोटू बोला, “अरे पतलू, मौका हाथ से निकल गया तो क्या करेंगे? चलो न, अभी चलते हैं!”

थोड़ा सोचने के बाद पतलू ने कहा, “ठीक है, लेकिन हमें समझदारी से जाना होगा।”

अगली सुबह दोनों जंगल की ओर निकल पड़े। रास्ता आसान नहीं था। कभी ऊँचे पहाड़ सामने आ जाते, कभी फिसलन भरी चट्टानें रास्ता रोक लेतीं, तो कभी घना जंगल दिखाई देता। मोटू जोश में जल्दी-जल्दी आगे बढ़ने लगा और कई बार फिसल भी गया।

पतलू ने उसे टोकते हुए कहा, “मोटू, धीरे चलो। बिना सोचे आगे बढ़ना ठीक नहीं है।”

कुछ दूर चलने के बाद मोटू अचानक बैठ गया और बोला, “पतलू, मुझसे आगे नहीं चला जा रहा। बहुत भूख लग रही है।”

पतलू ने उसकी तरफ देखा और मुस्कराकर कहा, “थोड़ा धैर्य रखो मोटू। हर मुश्किल का कोई न कोई हल होता है।”

उसने आसपास ध्यान से देखा और एक सुरक्षित रास्ता खोज निकाला। “देखो मोटू, इस रास्ते से चलेंगे तो आसानी होगी।”

मोटू खुशी से बोला, “वाह पतलू! तुम्हारा दिमाग तो सच में कमाल का है।”

काफी मेहनत और धैर्य के बाद दोनों आखिरकार उस जगह पहुँच गए जहाँ खजाना होने की बात कही जा रही थी। वहाँ एक पुराना संदूक रखा था। मोटू ने उत्साह में आकर कहा, “जल्दी खोलो पतलू! अंदर ढेर सारे समोसे और सोना होगा।”

जब उन्होंने संदूक खोला, तो अंदर सोना या चाँदी नहीं थी। वहाँ किताबें, खेल का सामान और स्वस्थ व पौष्टिक भोजन रखा हुआ था। यह देखकर मोटू थोड़ा निराश हो गया और बोला, “अरे! इसमें तो कुछ और ही है।”

पतलू ने मुस्कराते हुए कहा, “मोटू, यही असली खजाना है। ज्ञान और अच्छा स्वास्थ्य सबसे बड़ी दौलत होते हैं।”

मोटू ने कुछ देर सोचा और फिर सिर हिलाते हुए बोला, “तुम सही कह रहे हो पतलू। यह खजाना तो सच में बहुत काम का है।”

दोनों खजाने की चीज़ें लेकर फुरफुरी नगर लौट आए और उन्होंने किताबें व खेल का सामान बच्चों में बाँट दिया। पूरा नगर खुशी से भर गया। बच्चों की मुस्कान देखकर मोटू ने कहा, “आज समझ आया कि सिर्फ खाने से नहीं, सीख से ज़िंदगी बेहतर बनती है।”

पतलू ने हँसते हुए कहा, “और जब दोस्त साथ हों, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।”

Motu Patlu Ki Kahani

Ek din Furfuri Nagar mein achanak yeh charcha phail gayi ki paas ke jungle mein ek rahasyamayi khazana chhupa hua hai. Log keh rahe the ki jo bhi us khazane ko dhoond lega, use bada inaam milega. Yeh khabar sunte hi poore nagar mein halchal mach gayi aur har koi usi ke baare mein baatein karne laga.

Yeh sunte hi Motu uchhal pada aur khushi se chillaaya, “Patlu! Agar khazana mil gaya to main zindagi bhar samose khaoonga!”

Patlu ne muskurate hue lekin shaant swar mein kaha, “Motu, itni jaldi khush mat ho. Pehle yeh samajhna zaroori hai ki khazana sach mein hai bhi ya nahi.”

Motu bola, “Are Patlu, mauka haath se nikal gaya to kya karenge? Chalo na, abhi chalte hain!”

Thoda sochne ke baad Patlu ne kaha, “Theek hai, lekin hume samajhdari se jaana hoga.”

Agli subah dono jungle ki or nikal pade. Rasta aasan nahi tha. Kabhi oonche pahad saamne aa jaate, kabhi fislan bhari chattanen rasta rok leti, to kabhi ghana jungle dikhai deta. Motu josh mein jaldi-jaldi aage badhne laga aur kai baar fisal bhi gaya.

Patlu ne use tokate hue kaha, “Motu, dheere chalo. Bina soche aage badhna theek nahi hai.”

Kuch door chalne ke baad Motu achanak baith gaya aur bola, “Patlu, mujhse aage nahi chala ja raha. Bahut bhukh lag rahi hai.”

Patlu ne uski taraf dekha aur muskurakar kaha, “Thoda dhairya rakho Motu. Har mushkil ka koi na koi hal hota hai.”

Usne aaspaas dhyan se dekha aur ek surakshit rasta khoj nikala. “Dekho Motu, is raste se chalenge to aasani hogi.”

Motu khushi se bola, “Wah Patlu! Tumhara dimaag to sach mein kamaal ka hai.”

Kaafi mehnat aur dhairya ke baad dono aakhirkar us jagah pahunch gaye jahan khazana hone ki baat kahi ja rahi thi. Wahan ek purana sandook rakha tha. Motu ne utsaah mein aakar kaha, “Jaldi kholo Patlu! Andar dher saare samose aur sona hoga.”

Jab unhone sandook khola, to andar sona ya chaandi nahi thi. Wahan kitaben, khel ka samaan aur swasth v paustik bhojan rakha hua tha. Yeh dekhkar Motu thoda niraash ho gaya aur bola, “Are! Ismein to kuch aur hi hai.”

Patlu ne muskurate hue kaha, “Motu, yahi asli khazana hai. Gyaan aur achha swasthya sabse badi daulat hote hain.”

Motu ne kuch der socha aur phir sir hilate hue bola, “Tum sahi keh rahe ho Patlu. Yeh khazana to sach mein bahut kaam ka hai.”

Dono khazane ki cheezen lekar Furfuri Nagar laut aaye aur unhone kitaben v khel ka samaan bachchon mein baant diya. Poora nagar khushi se bhar gaya. Bachchon ki muskaan dekhkar Motu ne kaha, “Aaj samajh aaya ki sirf khane se nahi, seekh se zindagi behtar banti hai.”

Patlu ne hanste hue kaha, “Aur jab dost saath hon, to har mushkil aasaan ho jaati hai.”

मोटू पतलू की कहानी से सीख

मोटू पतलू की कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि इसमें बच्चों के लिए कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य छुपे हुए हैं। इस कहानी से हमें यह समझ में आता है कि जीवन में सफलता केवल ताकत या भाग्य पर निर्भर नहीं करती, बल्कि समझदारी, धैर्य और सही निर्णय लेने की क्षमता बहुत ज़रूरी होती है।

  1. समझदारी ताकत से ज़्यादा ज़रूरी है
    कहानी में मोटू की भले ही ताकत और ऊर्जा बहुत है, लेकिन जब मुश्किलें आती हैं, तो केवल ताकत काम नहीं आती। पतलू की समझदारी और सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता ही उन्हें मुश्किल हालात से निकालती है। यह हमें सिखाती है कि किसी भी काम में जल्दीबाज़ी या सिर्फ शक्ति के भरोसे निर्णय करना हमेशा सही नहीं होता।
  2. दोस्ती में सहयोग आवश्यक है
    मोटू और पतलू अलग-अलग स्वभाव के हैं, लेकिन उनकी दोस्ती और एक-दूसरे पर भरोसा उन्हें हर मुसीबत में सफलता दिलाता है। यह हमें सिखाता है कि दोस्तों के साथ सहयोग करना और एक-दूसरे की मदद करना बहुत महत्वपूर्ण है। अकेले काम करने की बजाय जब हम मिलकर सोचते हैं और काम करते हैं, तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
  3. जल्दबाज़ी नुकसान पहुँचा सकती है
    कई बार मोटू अपनी जल्दीबाज़ी और अधीरता की वजह से फिसल जाता है या मुश्किल में फँस जाता है। यह हमें बताता है कि किसी भी काम में जल्दबाज़ी करना हानिकारक हो सकता है। सोच-समझकर, धैर्य और योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाना हमेशा लाभकारी होता है।
  4. ज्ञान सबसे बड़ा खजाना है
    जंगल में जो खजाना मिला, वह सोना-चाँदी नहीं था, बल्कि किताबें, खेल का सामान और पौष्टिक भोजन था। यह दिखाता है कि असली खजाना सिर्फ पैसा या दौलत नहीं होता। ज्ञान, सीख और स्वस्थ जीवन ही जीवन का सबसे बड़ा धन है। इसे प्राप्त करके हम हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

Motu Patlu Ki Kahani Se Seekh

Motu Patlu ki kahani sirf manoranjan ke liye nahi hai, balki ismein bachchon ke liye kai mahatvapurn jeevan moolya chhupe hue hain. Is kahani se hume yeh samajh mein aata hai ki jeevan mein safalta keval taakat ya bhagya par nirbhar nahi karti, balki samajhdari, dhairya aur sahi nirnay lene ki kshamta bahut zaroori hoti hai.

  1. Samajhdari taakat se zyada zaroori hai
    Kahani mein Motu ki bhale hi taakat aur urja bahut hai, lekin jab mushkilein aati hain, to keval taakat kaam nahi aati. Patlu ki samajhdari aur soch-samajhkar nirnay lene ki kshamta hi unhe mushkil haalaat se nikalti hai. Yeh hume sikhati hai ki kisi bhi kaam mein jaldbazi ya sirf shakti ke bharose nirnay karna hamesha sahi nahi hota.
  2. Dosti mein sahyog aavashyak hai
    Motu aur Patlu alag-alag swabhaav ke hain, lekin unki dosti aur ek doosre par bharosa unhe har musibat mein safalta dilata hai. Yeh hume sikhata hai ki doston ke saath sahyog karna aur ek doosre ki madad karna bahut mahatvapurn hai. Akela kaam karne ki bajay jab hum milkar sochte hain aur kaam karte hain, to mushkilein aasaan ho jaati hain.
  3. Jaldbazi nuksan pahucha sakti hai
    Kai baar Motu apni jaldbazi aur adhirta ki wajah se fisal jaata hai ya mushkil mein phans jaata hai. Yeh hume batata hai ki kisi bhi kaam mein jaldbazi karna hanikarak ho sakta hai. Soch-samajhkar, dhairya aur yojanabaddh tareeke se kadam uthana hamesha laabhkari hota hai.
  4. Gyaan sabse bada khazana hai
    Jungle mein jo khazana mila, woh sona-chaandi nahi tha, balki kitaben, khel ka samaan aur paustik bhojan tha. Yeh dikhata hai ki asli khazana sirf paisa ya daulat nahi hota. Gyaan, seekh aur swasth jeevan hi jeevan ka sabse bada dhan hai. Ise prapt karke hum har mushkil ka samna kar sakte hain aur khushhaal jeevan jee sakte hain.

मोटू पतलू की कहानी का सारांश

मोटू पतलू की कहानी दो सच्चे और निडर दोस्तों, मोटू और पतलू, की मजेदार और रोमांचक कहानी है। यह कहानी बच्चों के लिए न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण सबक भी सिखाती है। फुरफुरी नगर में रहने वाले ये दोनों दोस्त हमेशा एक-दूसरे का साथ देते हैं और किसी भी मुश्किल का सामना मिलकर करते हैं।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ज्ञान, धैर्य और दोस्ती किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़ी ताकत हैं। चाहे सामने कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न हो, अगर दोस्त साथ हों और समझदारी से निर्णय लिए जाएँ, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। मोटू की उत्सुकता और कभी-कभी जल्दबाज़ी हमें यह याद दिलाती है कि ऊर्जा और जोश अच्छे हैं, लेकिन सोच-समझकर काम करना उससे भी ज़रूरी है। वहीं पतलू की समझदारी और धैर्य यह बताते हैं कि बिना दिमाग और संयम के कोई भी काम पूरा नहीं हो सकता।

साथ ही, जंगल में मिलने वाला खजाना जो सोना या चाँदी नहीं बल्कि ज्ञान और स्वस्थ जीवन के साधन था, हमें यह सिखाता है कि असली सफलता केवल धन में नहीं, बल्कि सीख, अनुभव और अच्छे दोस्तों में होती है। मोटू पतलू की कहानी यह भी समझाती है कि जीवन में खुश रहना, दूसरों की मदद करना और सही निर्णय लेना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

अंततः, यह कहानी बच्चों और माता-पिता दोनों को यह संदेश देती है कि सच्ची दोस्ती, धैर्य और सीखने की इच्छा जीवन में किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं। चाहे कोई समस्या बड़ी हो या छोटी, अगर हम समझदारी से काम लें और अपने दोस्तों के साथ मिलकर आगे बढ़ें, तो हर बाधा पार की जा सकती है।

Motu Patlu Ki Kahani Ka Saaransh

Motu Patlu ki kahani do sacche aur nidar doston, Motu aur Patlu, ki mazedaar aur romanchak kahani hai. Yeh kahani bachchon ke liye na keval manoranjan ka madhyam hai, balki jeevan ke mahatvapurn sabak bhi sikhati hai. Furfuri Nagar mein rehne wale ye dono dost hamesha ek-doosre ka saath dete hain aur kisi bhi mushkil ka samna milkar karte hain.

Is kahani se hume yeh sikhne ko milta hai ki gyaan, dhairya aur dosti kisi bhi lakshya ko haasil karne mein sabse badi taakat hain. Chahe saamne kitni bhi badi chunauti kyon na ho, agar dost saath hon aur samajhdari se nirnay liye jaayein, to har mushkil aasaan ho jaati hai. Motu ki utsukta aur kabhi-kabhi jaldbazi hume yeh yaad dilati hai ki urja aur josh achhe hain, lekin soch-samajhkar kaam karna usse bhi zaroori hai. Wahi Patlu ki samajhdari aur dhairya yeh dikhate hain ki bina dimaag aur sanyam ke koi bhi kaam poora nahi ho sakta.

Saath hi, jungle mein milne wala khazana jo sona ya chaandi nahi balki gyaan aur swasth jeevan ke saadhan tha, hume yeh sikhata hai ki asli safalta keval dhan mein nahi, balki seekh, anubhav aur achhe doston mein hoti hai. Motu Patlu ki kahani yeh bhi samjhaati hai ki jeevan mein khush rehna, doosron ki madad karna aur sahi nirnay lena hi sabse badi uplabdhi hai.

Antatah, yeh kahani bachchon aur mata-pita dono ko yeh sandesh deti hai ki sacchi dosti, dhairya aur seekhne ki ichha jeevan mein kisi bhi lakshya ko haasil karne ki kunji hain. Chahe koi samasya badi ho ya chhoti, agar hum samajhdari se kaam lein aur apne doston ke saath milkar aage badhein, to har baadha paar ki ja sakti hai.

Frequently Asked Questions

मोटू पतलू की कहानी में मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?

मोटू पतलू की कहानी में मुख्य पात्र मोटू और पतलू हैं। मोटू एक मज़ेदार, खाने का शौकीन और उत्साही दोस्त है और पतलू एक समझदार, धैर्यवान और समस्या‑सुलझाने वाला दोस्त है।

मोटू को सबसे ज़्यादा क्या पसंद है?

मोटू को समोसे बहुत पसंद हैं, और कई बार वह समोसे खाने के बाद मज़ेदार ताकत महसूस करता है।

मोटू पतलू की कहानी किस शहर में सेट है?

कहानी फुरफुरी नगर नामक कल्पित शहर में सेट है, जहाँ मोटू और पतलू रहते हैं और अपनी मज़ेदार परेशानियों का सामना करते हैं।

मोटू पतलू की कहानी का मूल स्रोत क्या है?

मोटू पतलू के पात्र लोटपोट कॉमिक्स से प्रेरित हैं, और बाद में इन्हें टीवी सीरीज़ में भी दिखाया गया।

मोटू पतलू में मुख्य खलनायक कौन होता है?

सीरीज़ में मुख्य खलनायक “जॉन द डॉन” है, जो अक्सर मोटू और पतलू की योजनाओं को बाधित करता है।

क्या मोटू पतलू की कहानी केवल कहानी तक सीमित है?

नहीं, मोटू पतलू की कहानी पर आधारित टीवी शोज, कॉमिक्स, YouTube वीडियोज़ और लाइव इवेंट भी बहुत लोकप्रिय हैं।

मोटू पतलू की कहानी में हास्य किससे आता है?

हास्य अधिकतर मोटू की मस्ती, उसकी जल्दबाज़ी और पतलू की समझदारी के बीच की मज़ेदार बातचीत से आता है।

क्या मोटू पतलू की कहानी सिर्फ बच्चों के लिए है?

हालाँकि यह कहानी खासकर बच्चों के लिए है, पर इसकी दोस्ती, साहस और सीख की वजह से यह बड़ों को भी पसंद आती है।

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निष्कर्ष

मोटू पतलू की कहानी केवल एक मनोरंजक कहानी नहीं है, बल्कि यह बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन-शिक्षा भी देती है। इस कहानी के माध्यम से बच्चे सीखते हैं कि दोस्ती, समझदारी और धैर्य जीवन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं। मोटू और पतलू के साहसिक और मज़ेदार अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि मुश्किल हालात में सही निर्णय और एक-दूसरे का साथ हर समस्या को आसान बना सकता है।

साथ ही, यह कहानी यह भी सिखाती है कि असली सफलता केवल धन या दौलत में नहीं, बल्कि ज्ञान, स्वास्थ्य और अच्छे दोस्तों में निहित होती है। मोटू पतलू हमें यह याद दिलाते हैं कि जीवन में खुश रहने, सीखने और सहयोग करने की भावना ही सबसे बड़ी दौलत है, और यही बच्चे और बड़े दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।

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